ना मोहब्बत की शिद्दत 
न नफरत की हैसियत 
खाकसार की फितरत तो बस खाक होने की है||

 

यूँ संभाल के खर्च की 
ये उधार की ज़िन्दगी 
मानो बचत को देख के 
वो मोहलत दे देगा||

 

बेबसी का आलम है या मरने की ललक 
की सांसो ने भी अब चलना छोड़ दिया है 
अब ये चलती नहीं, इन्हे खींचना पड़ता है ||

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