Amit Singh

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हे मैथिल, अब भी सचेत हो जाओ नहीं तो मिट à¤

नवरात्री चल रहा है, पूरा देश में डांडिया और गरबा का धूम मचा हुआ है. मिथिला Read More

उठो जागो और इस अन्याय के खिलाफ अपना आवà¤

हममें से कोई व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो अपने जीवन एक बार नहीं कई बार दहेज़ Read More

क्या आपको याद है आज 16 दिसम्बर है !

क्या पता है आपको आज 16 दिसम्बर है... वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान 16 दिसंबर Read More

विरोध या दिखावा !

चीनी सामान का विरोध मेड इन चाइना मोबाइल से करने का मजा ही कुछ और है... उस पर Read More

उन्हें चिंता है

उन्हें चिंता है कल की रोटी की, तुम्हे चिंता है कल की बोटी की.... उन्हें चिंता है Read More

ये किस ने सोचा था ! ! ! !

एक संस्था जिसकी स्थापना मार्च २०१५ के अंत में मिथिला के क्षेत्र और छात्र के Read More

किसान

जी तोड़ मेहनत कर किसान फसल उगाता है, पर ए कैसी बिडम्बना है की वो भूखो रह जाता Read More

लालू जी ने जो कहा वो कर दिखाया ! ! !

पप्पू यादव तो याद होगा न आपलोगों को, अरे वही पप्पू यादव जी जो खुद भी सांसद हैं Read More

सब याद है पर......! ! !

हफ्तों पहले से घाट बनाना पुरे बारी का केला थम्ब को इसके लिए कट डालना छठ घाट Read More

सामा-चकेवा(विलुप्त होता एक त्यौहार ) !!

रक्षाबंधन और भरदुतिया के आलावा सामा-चकेवा भी भाई-बहिन के प्रेम को दर्शाने Read More

काश फिर से वो दिन वापस आते ! ! !

आज विजयदशमी है, रावण वध व् माता के प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा Read More

जून की दोपहरी ! !

जून के दोपहर मे, गुजर रहा था रास्ते से, सहसा मेरा ध्यान अटका उस कुडे के ढेर पे, Read More

सेकुलरिज्म और तथाकथित बुद्दिजीवी !!

बहुत सारे लेखक साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिए है और बहुत सरे लाइन में है Read More

किसान

जी तोड मेहनत कर किसान फसल उगाता है, पर ए कैसी बिडम्बना है की वो भूखो रह जाता Read More

तथाकथित सेकुलरिज्म ! ! !

किसी भी व्यक्ति का धर्मपरिवर्तन लोभ दे के या जबरदस्ती करवाना सही नहीं हो Read More

हमे आने दो ना...

हमे आने दो ना... गर हम न होंगे तो पिता कौन जनेगा... बेटा कौन जनेगा... बेटी कौन Read More

रोज सुनता हूँ ! ! !

रोज सुनता हूँ, आज उसके साथ हो गया, फिर सोचने लगता हूँ, पता नई कल किसके साथ Read More

भोरे-भोरे वो उठ के चली चौर की ओर....

भोरे-भोरे वो उठ के चली चौर की ओर, गोद में चार माह के बच्चे को सँभालते हुए, हाँथ Read More

यात्रावृतांत: इससे अच्छा तो गुलाम ही ठ

17 जुलाई 2015 दिन शुक्रवार, मैं सबेरे 7 बजे ही दरभंगा रेलवे स्टेशन पहुँच चूका था. Read More

अपनी भाषा

अपनी भाषा के समृधि के बिना हम बढ नही सकते हैं आगे.. अपनी भाषा मे छिपी है अपनी Read More



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